Contrast ratio, Native and Dynamic contrast के बारे मै जानिए

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Source – ViewSonic

कॉनट्रास्ट अनुपात(Contrast ratio) एक किसी भी डिजिटल डिस्प्ले द्वारा उत्पादित सबसे चमकीले सफेद और सबसे गहरे काले रंग की चमक के बीच का अनुपात है।

ज्यादा Contrast ratio गहरे काले रंग के लिए काम करते हैं, जो समग्र तस्वीर की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव लाते हैं। एक उदाहरण 2,500:1 का स्थिर विपरीत अनुपात होगा, जिसका अर्थ है कि सबसे चमकदार सफेद सबसे गहरे काले रंग की तुलना में 2,500 गुना अधिक चमकीला होता है। सामान्य धारणा यह है कि अनुपात जितना बड़ा होगा, विस्तार के उतने ही अधिक स्तर स्क्रीन पर दिखाए जाएंगे। साधारण शब्दों मै बताया जाये तो जितना ज्यादा Contrast ratio होगा उतना ही अच्छा वो डिस्प्ले होगा।

Native or Dynamic contrast ratio क्या है?

डायनामिक कंट्रास्ट फ़ंक्शन स्वचालित रूप से इनपुट विज़ुअल सिग्नल का पता लगाता है और इष्टतम कंट्रास्ट बनाने के लिए चित्र को समायोजित करता है। इससे चित्र में वस्तुओं को देखना आसान हो जाता है, विशेष रूप से अंधेरे या रात के समय के दृश्यों में।

दूसरी ओर Native Contrast अनुपात एक ही समय में एक ही छवि से सफेद और काले माप का अनुपात है। इसे प्रोजेक्टर या टेलीविजन का सही कंट्रास्ट माना जाता है लेकिन यह संख्या अक्सर निर्माताओं द्वारा प्रदान नहीं की जाती है।

आपको Contrast ratio क्यों ध्यान मैं क्यों रखना चाहिए?

किसी भी डिस्प्ले का Contrast ratio से आप उसके अच्छे होने की पुष्टि कर सकते है। मान लें कि आपके पास दो डिस्प्ले हैं, पहले वाले का कंट्रास्ट अनुपात 4,00,000:1 है और दूसरे का अनुपात 30,000,000:1 है, इसलिए इस मामले में पहला डिस्प्ले दूसरे डिस्प्ले से बेहतर होगा और यह आपको बेहतर पिक्चर क्वालिटी भी देगा।

तो इसी कारणवश आपको Contrast ratio को ध्यान मैं रखना चाहिए जिससे की आप किसी भी वक्त कोई अच्छी डिस्प्ले का प्रोडक्ट लेना चाहे तो अंदाजा लग जाये कोनसा डिस्प्ले बेस्ट है !

तो आशा करते है की आपको contrast ratio के बारे मैं सभकुच पता चल गया होगा, धन्यवाद!

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